美国一名大学教授因为在学校电邮中呼吁学生勿在校园内说中文而引发争议,她被撤去研究院总监一职。
北卡罗来纳州杜克大学的助理教授梅根·尼利(Megan Neely)在致函学生的电邮中提到,两位不具名的生物统计系硕士课程的人员向她投诉,学生在系内的公众地方说中文。
她表示,国际学生不说英文会导致“意想不到的后果”。
她的电邮在推特(Twitter)和中国社交媒体火起来,杜克大学已承诺对生物统计学硕士项目进行审查。
许多人批评尼利博士的电子邮件涉种族主义言论或麻木不仁,并引发了教师歧视国际学生的担忧。
但硕士课程中一些少数族裔学生为尼利辩护,形容她是支持学生的课程总监,并称她“绝对不是种族主义者,一点儿也不是”。
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到底发生甚么事?
尼利给予生物统计学系学生的电邮截图在周末流传,引起争议,杜克大学向美国媒体证实,这些截图是真实的。
尼利说,两名生物统计学系的教员问她有没有硕士课程学生的照片,并称有多名一年级学生,用他们的话说,“非常吵闹地”在休息室里讲中文。
尼利说,生物统计学系教员要求她记下这些学生的名字,当这些学生因实习而面试,或在硕士项目上与他们合作时,能够记得他们。他们对这些学生没有利用机会改善他们的英语感到失望,而在一个地方以其他人不明白的语言沟通十分无礼。
“各位国际学生,”她说,“请请请你们要谨记,在大厦内说中文可能会有意想不到的后果。”
她同时还说,虽然她很尊重国际学生在“非母语”环境下的学习,但她鼓励国际学生在生物统计学系大楼内或任何专业环境中尝试“100%地使用英语”。
这封电邮泄露后在网上引发关注,杜克大学校报《纪事报》(The Chronicle)亦作出跟进报道。许多人认为电邮所用的言辞带点傲慢,自以为高人一等,亦有人问为甚么学生说中文时被针对,但就不是其他外国语言。
而更令人关注的是两名生物统计学系教员的所作所为,他们被指按照学生与朋友沟通的语言方式来歧视他们。
一个自称“关注杜克学生”的团体发起联署,他们称“深切关注”学生的多元国籍背景,会否因为在课室以外说母语,而在学术及就业机会中受到惩罚。
该组织对BBC说,截至周日,已收到超过二千人联署,当中包括杜克学生及校友,亦有来自其他学府的学生。
该组织声明说,“我们承认语言困难可以对许多国际学生构成障碍,但我们认为,这是杜克应该更加尊重和理解我们的原因。”
杜克大学负责生物统计学项目的医学院院长玛丽‧克洛特曼(Mary Klotman)周末向学生发信称,“目前绝对没有任何规定限制你们用来交谈和交流的语言。你们的仕途机会或是否获得推荐,也不会因为你们在课室外使用甚么语言而受到影响,你们的隐私将始终得到保护。”
Monday, January 28, 2019
Friday, January 18, 2019
प्लेन से दिल्ली आएगा गाय का प्रीमियम दूध, दाम 120 रुपये लीटर
दिल्ली वालों को अब सीधे पुणे के डेयरी फार्म से उनके घर तक प्रीमियम क्वालिटी का शुद्ध दूध मिलेगा. 120 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर मिलने वाला यह दूध हर दिन फ्लाइट से सीधे दिल्ली लाया जाएगा. पराग मिल्क फूड्स लिमिटेड ने दिल्ली-एनसीआर के बाजार में हर दिन 10,000 लीटर प्रीमियम ताजा गाय के दूध की सप्लाई करने की घोषणा की है. कंपनी यह प्रीमियम दूध 'प्राइड ऑफ कॉउज' ब्रांड के नाम से बेचेगी.
कंपनी के महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और हरियाणा में 29 लाख लीटर प्रतिदिन की कुल दूध प्रोसेसिंग क्षमता के प्लांट हैं. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पराग मिल्क ने पिछले वित्त वर्ष में कुल 1,950 करोड़ रुपये का कारोबार किया है. कंपनी 'गोवर्धन', 'गो' और 'प्राइड ऑफ काउज' सहित विभिन्न ब्रांडों के तहत दूध और अन्य डेयरी उत्पाद बेचती है. पिछले साल अप्रैल में, पराग मिल्क ने उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए सोनीपत स्थित दनोन के प्लांट को खरीदा था. अगस्त में, कंपनी ने इस प्लांट से कॉमर्शियल कामकाज शुरू किया तथा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पाउच में गाय का दूध बेचना शुरू किया.
पराग मिल्क फूड्स के अध्यक्ष देवेंद्र शाह ने दिल्ली में पत्रकारों को बताया, 'हम अब दिल्ली-एनसीआर के बाजार में अपने प्रीमियम दूध ब्रांड 'प्राइड ऑफ कॉउज' को पेश कर रहे हैं. हम इस गाय के दूध को 120 रुपये प्रति लीटर के दाम पर बेचेंगे. शुरुआत में, हम प्रति दिन 10,000 लीटर और अगले छह महीनों में बढ़ाकर प्रति दिन 20,000 लीटर दूध की आपूर्ति करेंगे.' उन्होंने कहा कि कंपनी पहले से ही इस प्रीमियम गाय दूध का हर दिन औसतन 34,000 लीटर सीधे तौर पर मुंबई, पुणे और सूरत में ग्राहकों को बेच रही है. गाय के प्रीमियम दूध की कीमत मुंबई और पुणे के बाजारों से अधिक है, जहां यह 95 रुपये प्रति लीटर के दाम पर बिक में रहा है.
शाह ने कहा, 'प्राइड ऑफ कॉउज' ब्रांड से कंपनी का राजस्व वित्त वर्ष 2013-18 में 28 प्रतिशत की वार्षिक विकास दर से बढ़ा है और यह इसी गति से आगे भी बढ़ता रहेगा. एनसीआर देश का सबसे बड़ा दूध बाजार है जो कि करीब 11,000 करोड़ रुपये का है. कंपनी की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अक्षाली शाह ने कहा, 'जैसे-जैसे ताजे दूध की प्रत्यक्ष खपत में वृद्धि हुई है, उपभोक्ता अपने उपभोग वाले दूध के स्रोत और पोषक तत्वों की मात्रा के प्रति सावधान हो गए हैं, जिसके कारण वे प्रीमियम गुणवत्ता वाले दूध के लिए अधिक निवेश करते है. दिल्ली-एनसीआर में ऐसे उपभोक्ताओं की बहुतायत होने के साथ, हमने इस क्षेत्र में विस्तार की बड़ी संभावना को देखा है.'
एक अनुमान के अनुसार भारत में भारत में डेयरी उद्योग 4 लाख करोड़ रुपये का है जिसमें सिर्फ 30 फीसदी मार्केट शेयर बड़ी कंपनियों का है. आईटीसी, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, पतंजलि और गोदरेज डेयरी उद्योग में आ चुके हैं और काफी पैसा भी लगा रहे हैं. दनोन, नेस्ले, अमूल, पराग जैसे खिलाड़ी पहले से हैं.
बता दें कि मोदी सरकार की बड़ी योजनाओं में से एक 'आयुष्मान भारत' के तहत 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपये तक के फ्री इलाज की सुविधा का प्रवाधान है. इस योजना का मकसद आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देना है. इसका फायदा योजना में शामिल सरकारी और अन्य अस्पतालों में लिया जा सकता है.
राष्ट्रीय जाट संरक्षण समिति के अध्यक्ष विपिन सिंह बालियान कहते हैं कि मुज़फ्फरनगर-शामली के दंगों के बाद से समुदाय की ओर से मुस्लिम-जाट की तैयार हो गई खाई को पाटने की पूरी कोशिश हुई है और उसका नतीजा कैराना में साफ़ दिखने को मिला जहां तबस्सुम हसन की भारी विजय हुई.
कहा तो यहां तक जाता है कि सपा-बसपा गठबंधन की जो ये रूपरेखा आज दिख रही है उसकी सोच उस समय ही उभरी थी.
विपिन सिंह बालियान कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में कम-से-कम 18 सीटें ऐसी हैं जहां जाटों के वोट का ज़बरदस्त प्रभाव है और ये बात अखिलेश और मायावती को भी समझनी होगी कि उन्हें यहां अजित सिंह की ज़रूरत होगी क्योंकि वही हमारे सबसे बड़े नेता हैं.
कंपनी के महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और हरियाणा में 29 लाख लीटर प्रतिदिन की कुल दूध प्रोसेसिंग क्षमता के प्लांट हैं. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पराग मिल्क ने पिछले वित्त वर्ष में कुल 1,950 करोड़ रुपये का कारोबार किया है. कंपनी 'गोवर्धन', 'गो' और 'प्राइड ऑफ काउज' सहित विभिन्न ब्रांडों के तहत दूध और अन्य डेयरी उत्पाद बेचती है. पिछले साल अप्रैल में, पराग मिल्क ने उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए सोनीपत स्थित दनोन के प्लांट को खरीदा था. अगस्त में, कंपनी ने इस प्लांट से कॉमर्शियल कामकाज शुरू किया तथा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पाउच में गाय का दूध बेचना शुरू किया.
पराग मिल्क फूड्स के अध्यक्ष देवेंद्र शाह ने दिल्ली में पत्रकारों को बताया, 'हम अब दिल्ली-एनसीआर के बाजार में अपने प्रीमियम दूध ब्रांड 'प्राइड ऑफ कॉउज' को पेश कर रहे हैं. हम इस गाय के दूध को 120 रुपये प्रति लीटर के दाम पर बेचेंगे. शुरुआत में, हम प्रति दिन 10,000 लीटर और अगले छह महीनों में बढ़ाकर प्रति दिन 20,000 लीटर दूध की आपूर्ति करेंगे.' उन्होंने कहा कि कंपनी पहले से ही इस प्रीमियम गाय दूध का हर दिन औसतन 34,000 लीटर सीधे तौर पर मुंबई, पुणे और सूरत में ग्राहकों को बेच रही है. गाय के प्रीमियम दूध की कीमत मुंबई और पुणे के बाजारों से अधिक है, जहां यह 95 रुपये प्रति लीटर के दाम पर बिक में रहा है.
शाह ने कहा, 'प्राइड ऑफ कॉउज' ब्रांड से कंपनी का राजस्व वित्त वर्ष 2013-18 में 28 प्रतिशत की वार्षिक विकास दर से बढ़ा है और यह इसी गति से आगे भी बढ़ता रहेगा. एनसीआर देश का सबसे बड़ा दूध बाजार है जो कि करीब 11,000 करोड़ रुपये का है. कंपनी की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अक्षाली शाह ने कहा, 'जैसे-जैसे ताजे दूध की प्रत्यक्ष खपत में वृद्धि हुई है, उपभोक्ता अपने उपभोग वाले दूध के स्रोत और पोषक तत्वों की मात्रा के प्रति सावधान हो गए हैं, जिसके कारण वे प्रीमियम गुणवत्ता वाले दूध के लिए अधिक निवेश करते है. दिल्ली-एनसीआर में ऐसे उपभोक्ताओं की बहुतायत होने के साथ, हमने इस क्षेत्र में विस्तार की बड़ी संभावना को देखा है.'
एक अनुमान के अनुसार भारत में भारत में डेयरी उद्योग 4 लाख करोड़ रुपये का है जिसमें सिर्फ 30 फीसदी मार्केट शेयर बड़ी कंपनियों का है. आईटीसी, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, पतंजलि और गोदरेज डेयरी उद्योग में आ चुके हैं और काफी पैसा भी लगा रहे हैं. दनोन, नेस्ले, अमूल, पराग जैसे खिलाड़ी पहले से हैं.
बता दें कि मोदी सरकार की बड़ी योजनाओं में से एक 'आयुष्मान भारत' के तहत 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपये तक के फ्री इलाज की सुविधा का प्रवाधान है. इस योजना का मकसद आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देना है. इसका फायदा योजना में शामिल सरकारी और अन्य अस्पतालों में लिया जा सकता है.
राष्ट्रीय जाट संरक्षण समिति के अध्यक्ष विपिन सिंह बालियान कहते हैं कि मुज़फ्फरनगर-शामली के दंगों के बाद से समुदाय की ओर से मुस्लिम-जाट की तैयार हो गई खाई को पाटने की पूरी कोशिश हुई है और उसका नतीजा कैराना में साफ़ दिखने को मिला जहां तबस्सुम हसन की भारी विजय हुई.
कहा तो यहां तक जाता है कि सपा-बसपा गठबंधन की जो ये रूपरेखा आज दिख रही है उसकी सोच उस समय ही उभरी थी.
विपिन सिंह बालियान कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में कम-से-कम 18 सीटें ऐसी हैं जहां जाटों के वोट का ज़बरदस्त प्रभाव है और ये बात अखिलेश और मायावती को भी समझनी होगी कि उन्हें यहां अजित सिंह की ज़रूरत होगी क्योंकि वही हमारे सबसे बड़े नेता हैं.
Thursday, January 10, 2019
महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी में फंसे पंड्या ने BCCI से मांगी माफी
भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पंड्या ने बीसीसीआई के कारण बताओ नोटिस का जवाब देते हुए कहा कि वह टीवी शो पर महिलाओं के खिलाफ की गई टिप्पणी के लिए ‘विनम्रतापूर्वक माफी मांगते हैं’, जिन्हें सेक्सिस्ट और स्त्री विरोधी करार दिया गया. नोटिस का जवाब देने के लिए उन्हें 24 घंटे का समय दिया गया था, पंड्या ने कहा कि उन्हें महसूस नहीं हुआ कि उनकी टिप्पणी असभ्य मानी जाएगी. उनके जवाब की एक कॉपी पीटीआई के पास है, जिसमें उन्होंने कहा, ‘मैंने एक चैट शो पर शिरकत की जिसमें मैंने यह महसूस किए बिना कुछ बयान दिए कि इन्हें अपमानजनक करार दिया जाएगा और इससे दर्शकों की भावनाओं को ठेस पहुंचेगी जिसके लिए मैं विन्रमतापूर्वक माफी मांगता हूं.’
पंड्या ने कहा, ‘मैं आपको आश्वस्त करना चाहूंगा कि इसमें मेरा इरादा किसी भी व्यक्ति को किसी भी तरह से आहत करने या समाज के किसी भी वर्ग को किसी भी तरह खराब तरीके से पेश करने का नहीं था. मैंने ये बयान शो के दौरान बातचीत करते हुए दे दिए और मुझे नहीं पता था कि इन बयानों को आपत्तिजनक पाया जाएगा.’ पच्चीस साल का यह खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के लिए यहां पर है. उसने कहा कि वह इस तरह का बर्ताव दोबारा नहीं दोहराएगा.
पंड्या के महिलाओं पर कमेंट से हरकत में आई BCCI, भेजा नोटिस
पंड्या ने कहा, ‘आश्वस्त रहिए, मैं बीसीसीआई का बहुत सम्मान करता हूं और इस तरह की घटना भविष्य में दोबारा नहीं हो, इसके लिए पूरे विवेक का इस्तेमाल करूंगा.’ पता चला है कि पंड्या ने भारतीय टीम प्रबंधन और यहां अपने साथियों से माफी मांग ली है. इस शो पर उनके साथी लोकेश राहुल ने भी शिरकत की, हालाकि वह महिलाओं और रिश्तों पर पूछे गए सवालों पर अधिक संयमित दिखे.
आपको बता दें कि हाल ही में टीवी शो 'कॉफी विद करण' में हार्दिक पंड्या अपने साथी खिलाड़ी केएल राहुल के साथ आए थे. शो के दौरान होस्ट करण जोहर ने दोनों खिलाड़ियों से उनकी निजी जिंदगी के बारे में सवाल किए थे. पंड्या ने इस दौरान अपनी निजी जिंदगी से जुड़े हुए कुछ सवालों का जवाब दिया. हार्दिक पंड्या ने इस दौरान रिलेशनशिप, डेटिंग और महिलाओं से जुड़े सवालों के जवाब देकर फैंस को हैरान कर दिया. पंड्या ने बताया कि उनके परिवार वालों की सोच काफी खुली हुई है और जब उन्होंने पहली बार लड़की के साथ शारीरीक संबंध बनाए तो घर आकर कहा, आज करके आया है.
'कॉफी विद करण' में विवादित खुलासे से मुश्किल में हार्दिक पंड्या, BCCI ले सकती है एक्शन
पंड्या ने अपने पुराने समय को याद करते हुए यह भी बताया कि वह अपने माता-पिता को पार्टी में लेकर गए जहां हार्दिक ने बेटे से पूछा कि किस महिला को देख रहा है? उन्होंने एक के बाद एक सभी महिलाओं की तरफ उंगली दिखाकर बताया कि मैं सभी को देख रहा हूं. पंड्या की महिला विरोधी बात को सुनने के बाद सोशल मीडिया ने उन्हें निशाने पर ले लिया था और उनके इस रवैये को बेहद ही शर्मनाक बताया था. वहीं सचिन तेंदुलकर से जुड़े कमेंट को लेकर सोशल मीडिया पर फैंस ने उन्हें जमकर लताड़ लगाई.
पंड्या ने कहा, ‘मैं आपको आश्वस्त करना चाहूंगा कि इसमें मेरा इरादा किसी भी व्यक्ति को किसी भी तरह से आहत करने या समाज के किसी भी वर्ग को किसी भी तरह खराब तरीके से पेश करने का नहीं था. मैंने ये बयान शो के दौरान बातचीत करते हुए दे दिए और मुझे नहीं पता था कि इन बयानों को आपत्तिजनक पाया जाएगा.’ पच्चीस साल का यह खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के लिए यहां पर है. उसने कहा कि वह इस तरह का बर्ताव दोबारा नहीं दोहराएगा.
पंड्या के महिलाओं पर कमेंट से हरकत में आई BCCI, भेजा नोटिस
पंड्या ने कहा, ‘आश्वस्त रहिए, मैं बीसीसीआई का बहुत सम्मान करता हूं और इस तरह की घटना भविष्य में दोबारा नहीं हो, इसके लिए पूरे विवेक का इस्तेमाल करूंगा.’ पता चला है कि पंड्या ने भारतीय टीम प्रबंधन और यहां अपने साथियों से माफी मांग ली है. इस शो पर उनके साथी लोकेश राहुल ने भी शिरकत की, हालाकि वह महिलाओं और रिश्तों पर पूछे गए सवालों पर अधिक संयमित दिखे.
आपको बता दें कि हाल ही में टीवी शो 'कॉफी विद करण' में हार्दिक पंड्या अपने साथी खिलाड़ी केएल राहुल के साथ आए थे. शो के दौरान होस्ट करण जोहर ने दोनों खिलाड़ियों से उनकी निजी जिंदगी के बारे में सवाल किए थे. पंड्या ने इस दौरान अपनी निजी जिंदगी से जुड़े हुए कुछ सवालों का जवाब दिया. हार्दिक पंड्या ने इस दौरान रिलेशनशिप, डेटिंग और महिलाओं से जुड़े सवालों के जवाब देकर फैंस को हैरान कर दिया. पंड्या ने बताया कि उनके परिवार वालों की सोच काफी खुली हुई है और जब उन्होंने पहली बार लड़की के साथ शारीरीक संबंध बनाए तो घर आकर कहा, आज करके आया है.
'कॉफी विद करण' में विवादित खुलासे से मुश्किल में हार्दिक पंड्या, BCCI ले सकती है एक्शन
पंड्या ने अपने पुराने समय को याद करते हुए यह भी बताया कि वह अपने माता-पिता को पार्टी में लेकर गए जहां हार्दिक ने बेटे से पूछा कि किस महिला को देख रहा है? उन्होंने एक के बाद एक सभी महिलाओं की तरफ उंगली दिखाकर बताया कि मैं सभी को देख रहा हूं. पंड्या की महिला विरोधी बात को सुनने के बाद सोशल मीडिया ने उन्हें निशाने पर ले लिया था और उनके इस रवैये को बेहद ही शर्मनाक बताया था. वहीं सचिन तेंदुलकर से जुड़े कमेंट को लेकर सोशल मीडिया पर फैंस ने उन्हें जमकर लताड़ लगाई.
Thursday, January 3, 2019
मेघालयः तीन हफ़्ते से खदान में फँसे मज़दूर, घरवालों को चमत्कार का इंतज़ारः ग्राउंड रिपोर्ट
"मैं बीते दो हफ्तों से अपने भांजों के इंतज़ार में यहां कोयला खदान के बाहर बैठा हुआ हूं. लेकिन पता नहीं वो ज़िंदा हैं भी या नहीं...."
22 साल के प्रेसमेकी दखार कोयले की खदान में फंसे अपने भांजों को याद कर भावुक हो जाते हैं.
"एनडीआरएफ़ के लोग इतने दिनों से यहां काम कर रहें है लेकिन किसी ने हमें नहीं बताया कि डिमोंमे और मेलामबोक को कब तक बाहर निकाला जाएगा."
मेघालय की अंधेरी, पानी से भरी और बेहद संकरी एक खदान में बीते 13 दिसंबर से 15 मज़दूर फंसे हुए हुए हैं.
दरअसल, ईसाई बहुल मेघालय में क्रिसमस से ठीक पहले लुमथरी गांव के ये दोनों युवक इस खदान में काम करने गए थे.
लेकिन 370 फ़ीट से भी ज़्यादा गहरी इस खदान में अचानक पानी भर आने से अंदर काम कर रहे सभी मज़दूर खदान में ही फंस गए.
हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा और बादलों का घर कहा जाने वाला मेघालय एक ख़ूबसूरत राज्य है, मगर अवैज्ञानिक और ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से जारी कोयला खनन और मज़दूरों की मौत की घटनाएं मेघालय को बदनाम कर रही हैं.
इस हादसे को लेकर परेशान प्रेसमेकी कहते हैं, "इलाके में बेरोज़गार युवकों की एक बड़ी आबादी है. जिनके पास कोयले की खदान में काम करने के अलावा और दूसरा विकल्प नहीं है क्योंकि खेती के काम में न इतनी कमाई है और न ही सबके पास उतनी ज़मीन है."
क्या उनको या फिर परिवार के लोगों को डिमोंमे और मेलामबोक के ज़िंदा बचने की उम्मीद है - ये पूछने पर वे कहते हैं, "इस घटना के 15 दिनों के बाद भी हमें लग रहा था कि मेरे दोनों भांजे जीवित बाहर आ जाएंगे. लेकिन जब भारतीय नौ सेना के गोताखोर पानी के अंदर जाकर कुछ भी तलाश नही सके तो हमारी उम्मीदें टूटने लगी हैं. कोई भला 20 दिन तक ऐसी ख़तरनाक अंधेरी खदान में कैसे ज़िंदा रह सकेगा. अगर ईश्वर कोई चमत्कार कर दे तो ही ये संभव होगा."
मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स ज़िले के जिस कोयला खदान में ये हादसा हुआ है, वहां तक पहुंचना आसान नहीं है.
जोवाई-बदरपुर नेशनल हाइवे से होते हुए मैं खलिरियाट तक तो पहुंच गया था लेकिन इसके आगे का सफर बेहद मुश्किल था.
दरअसल खलिरियाट से आगे क़रीब 35 किलो मीटर गाड़ी से पहुंचने के बाद लुमथरी गांव के पास खलो रिंगसन नामक इलाक़े में इस कोयला खदान तक पहुंचने के लिए टूटे फूटे पहाड़ी रास्ते और तीन छोटी-छोटी नदियों को पार करना पड़ता है.
खलिरियाट से इस इलाक़े में प्रवेश करते ही सड़क की दोनों तरफ़ कोयले के ढेर लगे हुए दिख जाते है जहां शनिवार को भी मज़दूर आम दिनों की तरह ही ट्रकों में कोयला लाद रहे थे.
ऐसा बिलकुल नहीं लग रहा था कि यहां अवैज्ञानिक तरिक़े से चल रही कोयला खदानों पर 2014 से नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल का प्रतिबंध है.
खदान में फंसे अपने चचेरे भाई का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे 28 साल के फाइहुनलांग सुबा अब अपने किसी भी रिश्तेदार और दोस्त को इन कोयला खदानों में काम करने के लिए नहीं भेजेंगे.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "इस कोयले की खदान में फंसा मेलाम दकार मेरा चचेरा भाई है. वो पहली बार कोयले की खदान में काम करने गया था."
"उसे रैट होल माइनिंग में काम करने का कोई अनुभव नहीं है. मैं जब इस गहरी खाई को देखता हूं तो डर के मारे कलेजा बैठ जाता है. पता नहीं उसका क्या हाल हुआ होगा."
"मैं कभी कोयले की खदान में काम नहीं करूंगा. भले ही भूखा मर जाउंगा."
एक सवाल का जवाब देते हुए फाइहुनलांग ने कहा, "हम काफ़ी ग़रीब और बेरोज़गार हैं. इस इलाक़े में अगर ज़िंदा रहने के लिए कई लोग अपनी जान का जोखिम उठाते हैं."
"मेलाम क्रिसमस से पहले थोड़ी ज्यादा कमाई करना चाहता था. इसलिए वो कोयले की खदान में काम करने चला गया. पता नहीं मैं दोबारा उससे कभी मिल पाऊंगा या नहीं."
22 साल के प्रेसमेकी दखार कोयले की खदान में फंसे अपने भांजों को याद कर भावुक हो जाते हैं.
"एनडीआरएफ़ के लोग इतने दिनों से यहां काम कर रहें है लेकिन किसी ने हमें नहीं बताया कि डिमोंमे और मेलामबोक को कब तक बाहर निकाला जाएगा."
मेघालय की अंधेरी, पानी से भरी और बेहद संकरी एक खदान में बीते 13 दिसंबर से 15 मज़दूर फंसे हुए हुए हैं.
दरअसल, ईसाई बहुल मेघालय में क्रिसमस से ठीक पहले लुमथरी गांव के ये दोनों युवक इस खदान में काम करने गए थे.
लेकिन 370 फ़ीट से भी ज़्यादा गहरी इस खदान में अचानक पानी भर आने से अंदर काम कर रहे सभी मज़दूर खदान में ही फंस गए.
हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा और बादलों का घर कहा जाने वाला मेघालय एक ख़ूबसूरत राज्य है, मगर अवैज्ञानिक और ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से जारी कोयला खनन और मज़दूरों की मौत की घटनाएं मेघालय को बदनाम कर रही हैं.
इस हादसे को लेकर परेशान प्रेसमेकी कहते हैं, "इलाके में बेरोज़गार युवकों की एक बड़ी आबादी है. जिनके पास कोयले की खदान में काम करने के अलावा और दूसरा विकल्प नहीं है क्योंकि खेती के काम में न इतनी कमाई है और न ही सबके पास उतनी ज़मीन है."
क्या उनको या फिर परिवार के लोगों को डिमोंमे और मेलामबोक के ज़िंदा बचने की उम्मीद है - ये पूछने पर वे कहते हैं, "इस घटना के 15 दिनों के बाद भी हमें लग रहा था कि मेरे दोनों भांजे जीवित बाहर आ जाएंगे. लेकिन जब भारतीय नौ सेना के गोताखोर पानी के अंदर जाकर कुछ भी तलाश नही सके तो हमारी उम्मीदें टूटने लगी हैं. कोई भला 20 दिन तक ऐसी ख़तरनाक अंधेरी खदान में कैसे ज़िंदा रह सकेगा. अगर ईश्वर कोई चमत्कार कर दे तो ही ये संभव होगा."
मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स ज़िले के जिस कोयला खदान में ये हादसा हुआ है, वहां तक पहुंचना आसान नहीं है.
जोवाई-बदरपुर नेशनल हाइवे से होते हुए मैं खलिरियाट तक तो पहुंच गया था लेकिन इसके आगे का सफर बेहद मुश्किल था.
दरअसल खलिरियाट से आगे क़रीब 35 किलो मीटर गाड़ी से पहुंचने के बाद लुमथरी गांव के पास खलो रिंगसन नामक इलाक़े में इस कोयला खदान तक पहुंचने के लिए टूटे फूटे पहाड़ी रास्ते और तीन छोटी-छोटी नदियों को पार करना पड़ता है.
खलिरियाट से इस इलाक़े में प्रवेश करते ही सड़क की दोनों तरफ़ कोयले के ढेर लगे हुए दिख जाते है जहां शनिवार को भी मज़दूर आम दिनों की तरह ही ट्रकों में कोयला लाद रहे थे.
ऐसा बिलकुल नहीं लग रहा था कि यहां अवैज्ञानिक तरिक़े से चल रही कोयला खदानों पर 2014 से नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल का प्रतिबंध है.
खदान में फंसे अपने चचेरे भाई का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे 28 साल के फाइहुनलांग सुबा अब अपने किसी भी रिश्तेदार और दोस्त को इन कोयला खदानों में काम करने के लिए नहीं भेजेंगे.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "इस कोयले की खदान में फंसा मेलाम दकार मेरा चचेरा भाई है. वो पहली बार कोयले की खदान में काम करने गया था."
"उसे रैट होल माइनिंग में काम करने का कोई अनुभव नहीं है. मैं जब इस गहरी खाई को देखता हूं तो डर के मारे कलेजा बैठ जाता है. पता नहीं उसका क्या हाल हुआ होगा."
"मैं कभी कोयले की खदान में काम नहीं करूंगा. भले ही भूखा मर जाउंगा."
एक सवाल का जवाब देते हुए फाइहुनलांग ने कहा, "हम काफ़ी ग़रीब और बेरोज़गार हैं. इस इलाक़े में अगर ज़िंदा रहने के लिए कई लोग अपनी जान का जोखिम उठाते हैं."
"मेलाम क्रिसमस से पहले थोड़ी ज्यादा कमाई करना चाहता था. इसलिए वो कोयले की खदान में काम करने चला गया. पता नहीं मैं दोबारा उससे कभी मिल पाऊंगा या नहीं."
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